जिस फिल्म के आधार पर ट्वीट था,उसे 38 साल से देख रहे लोग, लेकिन मुझे जेल में डाल दिया गया", कोर्ट में जमानत के लिए जुबैर की दलील

 जिस फिल्म के आधार पर ट्वीट था,उसे 38 साल से देख रहे लोग, लेकिन मुझे जेल में डाल दिया गया", कोर्ट में जमानत के लिए जुबैर की दलील

Report by Kamran -12/jul/2022 , at 12.50

जुबैर की ओर से दलील दी गई कि सरकार के पास शक्ति है कि ट्विटर से शिकायत करके ज़ुबैर का ट्वीट हटवा देती , लेकिन आज तक वो ट्वीट पब्लिक डोमेन में है. इससे दंगा भड़क सकता है तो क्यों सरकार ये ट्वीट ट्विटर से शिकायत करके नहीं हटवाया?



जुबैर के वकील क्या बोले...

फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर की जमानत अर्जी पर आज पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हो रही है। जुबैर की तरफ से वृंदा ग्रोवर पैरवी कर रही हैं। उन्होंने कोर्ट में कहा कि मैं एक फ़ैक्ट चैकर हूं , मैं पत्रकार हूं । मेरा काम है झूठी ख़बरों को फ़ैक्ट चेक करना। मेरे काम कुछ लोगों को बुरे लग सकता हैं ।
मैंने 2018 में ट्वीट किया है और मैंने ये ट्वीट किया है इस बात से मैं पीछे नहीं हट रहा।

इंडियन एक्सप्रेस में भी छपी ये इमेज


ये ट्वीट 1983 में बनाई गई ऋषिकेश मुखर्जी की एक फ़िल्म से लिया गया है। ये फ़िल्म आज भी देखी जा सकती है, उस पर रोक नहीं। उस फ़िल्म को देखने पर रोक नहीं है पर मुझे जेल में डाल दिया गया।  ये इमेज बहुत बार ट्वीट की गई है। ये इमेज एक बार इंडियन एक्सप्रेस में भी छपी है। बहुत लोगों ने यही इमेज कई बार अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट की है।

38 साल बाद भी किसी को आहत नहीं आज क्यू


उन्होंने कोर्ट में आगे दलील दी कि 1983 से 2022 से अब तक 38 साल तक ये फ़िल्म देखी गई, पर कोई दंगा नहीं  हुआ। 2018 में ट्वीट किया गया पर चार साल में दंगा नहीं हुआ, जिस अज्ञात हैंडल से शिकायत हुई है वो हैंडल नवंबर 2021 में बनाया गया। 19 जून 2022 को इस हैंडल से ट्वीट किया गया और उसके कुछ घंटों बाद दिल्ली पुलिस केस दर्ज कर लेती है और ये इस अज्ञात हैंडल का पहला ट्वीट था और सिर्फ़ एक फॉलोअर था। सरकार के पास शक्ति है कि ट्विटर से शिकायत करके ज़ुबैर का ट्वीट हटवा देती , लेकिन आज तक वो ट्वीट पब्लिक डोमेन में है। इससे दंगा भड़क सकता है तो क्यों सरकार ये ट्वीट ट्विटर से शिकायत करके नहीं हटवाया ? मुझे किसी और केस में पूछताछ में बुलाया जाता है और इस नए केस में गिरफ़्तार कर लिया जाता है।

मेरी राय ..

जब सरकार को पता चला कि  उस ट्वीट से दंगा हो सकता है तो सबसे पहले सरकार ud ट्वीट को डिलीट करवाए ।
आगे के लिए ऐसा करने पर जोड़ दे कर अलर्ट कर दिया जाता की ऐसा करने पर कानूनी कारवाई होगी । ये सही होता जैसा अभी सरकार कर रही है ये सही नही है जब आप सच्चाई दिखाने वाले के साथ ऐसा कर रहे हैं तो पता चलता है की आप पत्रकार को पिंजरे में रख रहे है पत्रकार का काम होता है की आप क्या कर रहे है बताए अब सच बताए आप आवाज दबाएं ये सही नही है।
आप की क्या राय है आप बताएं...











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