बिहार के इस निर्माणाधीन थर्मल पावर प्लांट में बीते 10 दिन से सैकड़ों मज़दूर हड़ताल पर हैं।

 बिहार के इस निर्माणाधीन थर्मल पावर प्लांट में बीते 10 दिन से सैकड़ों मज़दूर हड़ताल पर हैं। 

Date 30.09.2023 । Time 01:57
By Kamran Akmal 





थर्मल पावर प्लांट कब शुरू हुआ था । 

1320 मेगावाट की क्षमता वाले इस थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया था।
 2023 से यहां बिजली का उत्पादन और वितरण शुरू करने का लक्ष्य था।
लेकिन कई कारणों से यह परियोजना अब तक समाप्त नहीं हो सकी है। 

ये मामला कहां का है । 

मैं आपको बता दूं ये समस्या बिहार के बक्सर ज़िले के चौसा थर्मल पावर प्लांट की है। मज़दूरों की हड़ताल की वजह से यह पावर प्लांट एक बार फिर से चर्चे में है।

किसान क्यों धरने पर है । 
 
यहीं पे मैं आपको ये भी बता दूं , यहां भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ किसान लग भाग 11 महीने से आंदोलन कर रहें हैं। आरोप है कि पुलिस ने किसानों और उनके परिजन की पिटाई की है। इसी कारण सभी मजदूर 21 सितंबर से यहां काम कर रहे क़रीब साढ़े तीन हज़ार मज़दूर हड़ताल पर चले गए हैं। लेकिन कई मजदूरों का कहना है की मज़दूरों की मांग है, कि उन्हें कंपनी के रेट बोर्ड के हिसाब से पैसे मिले। साथ ही ओवरटाइम का भी मेहनत करेंगे उसका भी पैसा दिया जाए और पैसे समय से दिए जाएं, और मांग है कि उन्हें मेडिकल सुविधाएं व लेबर कॉलोनी से प्लांट पर आने-जाने के लिए अच्छी ट्रैवल सुविधा मुहैया कराई जाएं। लेकिन कोई मजदूरों का सुनने वाला नहीं है । 

ठेकेदार व अधिकारी फोन बंद कर के बैठे हुए है । 

यहीं पे मैं आपको बता दूं मजदूरों ने अपने कंपनी पे आरोप लगाते है की , जो पैसा मजदूरी करने का मिलता है रेट बोर्ड के हिसाब से नहीं मिलता है। 
जिस कंपनी और ठेकेदार के अंदर सभी मजदूर को हायर किया और फिर एल एंड टी ने ठेकेदार कंपनियों और एजेंसियों को ठेका दिया है। 
समस्या इन्हीं ठेकेदार कंपनियों और मज़दूरों के पेमेंट को लेकर है । ये ठेकेदार के आला अधिकारी ने फोन बंद कर के बैठे हुए है । जब आला अधिकारी फोन बंद कर के बैठे हुए है, तो इस समस्या का समाधान कैसे होगा इन मजदूरों का कोई न तो पूछने वाला है और न ही पैसा मिलने वाला है ये सारे मजदूर उम्मीद लगा कर बैठे है ।

ज़िलाधिकारी अंशुल अग्रावल कहते हैं

जैसी सूचना मुझे प्राप्त हुई है, तो एक निजी कंपनी है एल एंड टी, और वह निजी कंपनी अपने हिसाब से कई मज़दूरों को इस काम में लगाए हुए है। विगत कई वर्षों से वहाँ कार्य चल भी रहा है, लेकिन बीते 2-3 दिन से मज़दूरों की किन्ही समस्याओं की वजह से वहाँ काम बंद है। तो प्रशासनिक स्तर पर हम प्रयासरत हैं कि यदि कंपनी के अधिकारी या यूनियन के लोग हमें किसी प्रकार की सूचना देते हैं तो हम आगे की कार्रवाई करेंगे। हमसे किसी ने अब तक इस संदर्भ में कोई संपर्क नहीं किया है। 

 

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