नर्सिंग का कोर्स किया,30 बीघा जमीन बंजर से 20 लाख इनकम शुरू जयपुर। जयपुर
नर्सिंग का कोर्स किया,30 बीघा जमीन बंजर से 20 लाख इनकम शुरू जयपुर। जयपुर
जयपुर। जयपुर में 6 हजार और दिल्ली में 15 हजार की जॉब करने के बाद जवान सिंह (30) को समझ आया कि नौकरी करके बड़े शहरों में गुजारा नहीं हो सकता।
जवान सिंह ने नर्सिंग का कोर्स किया था। जयपुर में प्राइवेट हॉस्पिटल में एक साल नौकरी करने के बाद दिल्ली में कॉन्ट्रैक्ट बेस पर एंबुलेंस पर नौकरी मिली थी।
कम सैलरी के कारण जवान सिंह अपने गांव लौट आया। सीकर जिले के प्रेमपुरा गांव में उसकी पैतृक 30 बीघा जमीन बंजर थी।
जवान सिंह लौट तो आया, लेकिन बंजर जमीन में क्या करे, यह समझ नहीं पा रहा था। उसने यू-ट्यूब का सहारा लिया। सोशल मीडिया पर कम पानी में होने वाली फसलों के बारे में जाना। पता चला कि कम लागत में मैरीगोल्ड यानी गेंदा के फूलों की खेती की जा सकती है।
उसने सोशल मीडिया से ही फूलों की पौध लगाने की तकनीक सीखी और फिर कोलकाता से मैरीगोल्ड की वैरायटी की पौध ऑनलाइन मंगवाई। पौध लगाने के लिए जवान सिंह ने अपने बंजर खेत में जी-तोड़ मेहनत की। गोबर की खाद डाली। पौध लगाने के बाद उन्हें बूंद-बूंद सींचा। पहली बार जब जवान सिंह को 6 लाख रुपए का मुनाफा हुआ तो वह नौकरी को हमेशा के लिए भूल गया।
म्हारे देस की खेती में इस बार बात सीकर के युवा किसान जवान सिंह की।
सीकर शहर से 70 किलोमीटर दूर छोटा सा गांव है प्रेमपुरा। गांव के किसान जवान सिंह इलाके के युवाओं की प्रेरणा बन चुके हैं। जवान सिंह ने 2014 में सीकर के एसके सदन कॉलेज से नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के दौरान 3 साल तक जयपुर और दिल्ली जैसे शहरों में जॉब की। बहुत मामूली वेतन मिलता था। कभी दिन की ड्यूटी तो कभी रात की। हमेशा अलर्ट रहना पड़ता था। इमरजेंसी का काम था। उस सैलरी से गुजारा करना भी मुश्किल। ऐसे में जवान सिंह ने अपने गांव लौटने का मन बनाया।
किसान जवान सिंह ने बताया- आज अपनी 30 बीघा में से 15 बीघा जमीन का इस्तेमाल कर रहा हूं। 15 बीघा बची हुई है। फूलों की खेती और पॉली हाउस की सब्जियां मिलाकर लगभग 20 लाख सालाना की इनकम हो जाती है। पशुपालन से भी सालाना लगभग 10 लाख की कमाई है। यह सब नौकरी से पाना संभव नहीं था।
सालाना बंपर कमाई फूलों से
उन्होंने बताया- 2018 में गेंदा फूल की खेती यह सोचकर शुरू की थी कि दो महीने में उपज मिलना शुरू हो जाती है, पानी कम चाहिए और मेहनत कम है। फसल खराब भी हो जाए तो समय और मेहनत का ज्यादा नुकसान नहीं होता। लेकिन इन्हीं फूलों से सालाना 6 लाख से अधिक की इनकम हो रही है।
अपने सफर को लेकर जवान सिंह ने बताया- 2014 में पढ़ाई पूरी हुई तो जयपुर के एक निजी हॉस्पिटल में 6 हजार मंथली में बतौर नर्सिंगकर्मी जॉब की। जयपुर जैसे बड़े और महंगे शहर में इस सैलरी में सर्वाइव करना मुश्किल था। इसलिए मैंने एक साल ही काम किया और 2015 में दिल्ली के जेके लोन हॉस्पिटल में एंबुलेंस स्टाफ में नर्सिंगकर्मी के तौर पर जॉब हासिल कर ली।
यह जॉब कॉन्ट्रैक्ट बेस पर थी। सैलरी 15 हजार रुपए तक मिलने लगी थी। लेकिन जो समस्या जयपुर में थी उसने दिल्ली में भी पीछा नहीं छोड़ा। जितना बड़ा शहर, उतने अधिक खर्चे। इसलिए 15 हजार रुपए में दिल्ली में भी गुजारा मुश्किल से हो रहा था।
नौकरी से गुजारा करना हो गया था मुश्किल ,दिल्ली में 2017 तक करीब दो साल नौकरी की। जॉब और आर्थिक तंगी से इतना परेशान हुआ कि नौकरी छोड़ निराश होकर अपने गांव सीकर में प्रेमपुरा आ गया। यहां बंजर जमीन के अलावा कुछ नहीं था। पानी का कोई प्रबंध नहीं था परंपरागत खेती करने वाले किसानों की पहले ही कमर टूटी हुई थी। इतना पैसा नहीं था कि लाखों इन्वेस्ट कर कुछ नया प्रयोग करूं।
अब इंटरनेट पर दिनभर यही देखता था कि बंजर जमीन पर खेती में क्या ऑप्शन हैं। यू-ट्यूब पर बहुत सारे वीडियो देख डाले। इस दौरान मैरीगोल्ड यानी गेंदा के फूलों की खेती के बारे में जानकारी मिली। वीडियो में बताया था कि कैसे कम पानी में गेंदा की खेती की जा सकती है और मुनाफा भी कमाया जा सकता है।
इसके बाद मैंने गेंदा की खेती के बारे में जानना समझना शुरू किया। पौध कहां से मिलती है, वैरायटी कौन-कौनसी होती हैं, मेरे खेत की मिट्टी में फूल हो सकता है या नहीं। सारी जानकारी लेने के बाद मैंने खेत के 7 बीघा के हिस्से को फूलों की खेती के लिए तैयार किया। परिवार ने पूरा सहयोग दिया। खेतों को समतल कर क्यारियां बनाईं। गोबर की खाद डालकर मिट्टी को ठीक किया। पैसे चुकाकर पानी खरीदा और ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया। क्यारियों में खाद डालकर 20 दिनों के लिए छोड़ दिया।
कोलकाता से ऑनलाइन मंगवाई पौध
जवान सिंह ने बताया- खेत तैयार होने के बाद दूसरा स्टैप था पौध मंगवाने का। सोशल मीडिया से जानकारी मिली थी कि अच्छी क्वालिटी के गेंदा की पौध कोलकाता में मिलती है। 2018 में कोलकाता की एक नर्सरी से 20 हजार पौधे मैरीगोल्ड की रेड और यलो वैरायटी के मंगवाए। नर्सरी ने पौध को कोलकाता से गांव तक पहुंचाया। उस समय प्रति पौधा 2 रुपए के हिसाब से भेजा गया। इस तरह पौध का खर्च 40 हजार रुपए आया। कोलकाता से सीकर तक पौध आने का वाहन खर्च 15 हजार रुपए अलग से खर्च किया। इस तरह 55 हजार में पहली फसल लगी।
जुलाई के दूसरे सप्ताह में लगाए पौधे
जवान सिंह ने बताया- मानसून के बाद जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में पौध लगाई। 7 बीघा में बनी क्यारियों को पहले ही खाद डालकर तैयार कर लिया था। बेड से बेड की दूरी 4 फीट और पौधे से पौधे की दूरी 2 फीट रखी। दोपहर के 2 बजे के बाद हल्की छांव में पौध की रोपाई की। इसके बाद पौध हो हल्का पानी दिया। एक सप्ताह बाद पौध को पानी दिया। इसके बाद रोपे गए पौधे ग्रोथ करने लगे।
गेंदे की पौध लगाने के 60 से 70 दिन बाद पौधे पर फूल आने शुरू हो गए। इसके बाद मां, पापा और पत्नी के साथ 4-5 अन्य मजदूर लगाकर शाम को फूलों की तुड़ाई की। इस तरह दिसंबर 2018 में सात से आठ क्विंटल फूलों का उत्पादन हुआ।
खेतों से ही एक्सपोर्ट कर देते हैं फूल
जवान सिंह ने अपने खेत से ही फूलों को एक्सपोर्ट किया। अच्छी क्वालिटी मिली तो फूल व्यापारी प्रेमपुरा तक पहुंचने लगे। पहली बार जवान सिंह ने अपने गेंदे के फूल 70 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचे और सारा खर्चा निकालकर 6 लाख रुपए का मुनाफा हुआ।
जवान सिंह ने बताया- वैसे तो साल भर में गेंदा की पौध कभी भी लगाई जा सकती है। लेकिन गेंदा की खेती का मुख्य सीजन सर्दी है। इस मौसम में गेंदा की वृद्धि और फूलों की गुणवत्ता दोनों अच्छी होती है। वैसे इसे मानसून, सर्दी और गर्मी तीनों मौसमों में किया जा सकता है।
फार्म पॉन्ड बनाया, पॉली हाउस लगाया
पानी की व्यवस्था के लिए जवान सिंह ने खेत में 1.70 बीघा में 100×100 फीट का फार्म पॉन्ड भी बनवाया। इसकी क्षमता 3 लाख लीटर से अधिक है। पौधों की सिंचाई बूंद-बूंद पद्धति ड्रिप से की जाती है। इसके अलावा काम बढ़ा तो दो साल पहले जवान सिंह ने 7 बीघा में पॉली हाउस लगाया और खीरा, टमाटर, हरी मिर्च और अन्य फसलों की खेती भी शुरू की। सब्जियों से उन्हें 7 लाख रुपए तक की इनकम हो जाती है।
पशुपालन से होता है दोहरा लाभ
जवान सिंह कहते हैं कि अब फार्म हाउस पर 30 गाय और 20 भैंसें भी हैं। जो रोजाना 300 लीटर दूध देती हैं। गाय का दूध 35-40 रुपए लीटर तक बिक जाता है। सालाना 10 लाख रुपए से ज्यादा कमाई दूध से हो जाती है। किसान के लिए पशुपालन से दोहरा लाभ होता है। पशुओं के लिए चारा खेत से मिल जाता है और पशुओं के गोबर से खेतों को खाद मिल जाती है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें