36 मिनट में बने चित्र ने सबका ध्यान खींचा
36 मिनट में बने चित्र ने सबका ध्यान खींचा
राजस्थान,जयपुर। यदि मनुष्य अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है तो वो स्वाभाविक और सरल रहता है । ऐसे में जब बात कला की हो तो उसमें कलात्मक अभिव्यक्ति ही महत्त्वपूर्ण होती है ।
चित्रकार डॉ. रेणु शाही का कहाना है कि कवि, साहित्यकार चित्रकार आदि अनेक उपमाओं से अलंकृत गुरु रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कला को "अभिव्यक्ति" कहा है । इसी कथन को सार्थक करती इनकी यह "काशी" नामक चित्रकृति है, जो केवल छत्तीस मिनट में बनाई गई है ।
काग़ज़ पर एक्रेलिक रंग से बना यह चित्र एक आधुनिक संयोजन है जो क्षणिक व स्वाभाविक कला के रूप को दिखाता है । इसे बहुत से कला ज्ञानियों द्वारा इसे स्वीकार करना भी आसाना नहीं था परंतु सबके अपने- अपने रस बोध एवं दृष्टीकोण होते है । इसलिए कुछ कला विद्वानों द्वारा उसे सराहना भी मिली और यह सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने में सफल रही ।
कलाकार का कहाना है कि वो अपणे भवों को ही चित्र मे प्रस्तुत करती है । उन्हें चित्र रचना करने के लिए कहीं से नकल करने या अधिक समय लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है । जो उनके अंतर्मन में है उसी को चित्र धरातल पर अंकित कर देती है । इसका कारण उनका काशी से गहरा संबंध होना है । जहां से उन्होंने अपनी कला शिक्षा पूर्ण की है ।
आज भी गंगा का किनारा उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती है । जिसे वो चित्रों के माध्यम से व्यक्त करती है । अभी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजस्थान ललित कला अकादमी में अतिशय कलीत संस्थान द्वारा राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
जिसके समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप मे राजस्थान विश्विद्यालय के संगीत विभाग की प्रोफेसर गीता ताक के द्वारा विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर संस्थान की अध्यक्ष डॉ. रीता प्रताप, सचिव प्रो. यस. डी . मिश्रा और संयोजक बीना बंसल ने सभी कलाकारों को बधाई दी ।


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